
हिमाचल प्रदेश में अनेको दवा कंपनिया दवा निर्माण कर रही है । इन उद्योगों से काफी लोग रोज़गार से भी जुड़े है मगर बार बार दवाइयों के सैंपल फेल होने पर लोगो में दहशत का मौहाल है । लोगो के मन में संदेह है कि वो जिन दवाइयों का सेवन कर रहे है क्या वो उनके उपचार के लिए उपयुक्त है या कही उनके स्वास्थ्य के साथ कोई खिलवाड़ तो नहीं हो रहा । जिससे उनको अपने बहुमूल्य जीवन से हाथ धोने पड़े यह भय लोगो को सता रहा है । हिमाचल प्रदेश में बनीं दर्द निवारक कैंसर, एलर्जी, कफ सिरफ, बैक्टीरिया संक्रमण की 23 समेत देशभर की 58 दवाइयों के सैंपल फेल हो गए। केंद्रीय औषधि नियंत्रण संगठन ने फरवरी में 676 सैंपल लिए थे। बद्दी की नेक्सकेम बाॅयोटेक कंपनी की दर्द की दवा एसेपिक, पांवटा की लेबोरेट फार्मा की संक्रमण की दवा एमोक्सिलिन, परवाणू की हनुचैंम लैबोरेटरी की कैल्शियम व विटामिन डी-3, कालाअंब की प्रोटेक टेलीलिंक्स की बेहोशी की दवा प्रोपोफोल इंजेक्शन, बद्दी के खरूणी स्थित वीटा ड्रग की कैंसर की दवा एलएस प्रेगानिज, रोनम हेल्थ केयर का वैक्टीरिया इंफेक्शन का इंजेक्शन अमीकासिन, बद्दी के मलकू माजरा की एंज फार्मा का दर्द का इंजेक्शन और किशनपुरा स्थित ग्लेनमार्क की उच्च रक्तचाप की दवा टेलमी सार्टन, मेग्नाटेक कंपनी की वैक्टीरिया संक्रमण की दवा सेफाेडोक्साईमी प्रोक्सीटिल, सिरमौर की सनविट हेल्थ केयर की दांत से खून रोकने का ट्रेनेक्सामिक इंजेक्शन, बद्दी की सन फार्मास्युटिकल की चमड़ी के संक्रमण की दवा मिकोनाजोल नाईट्रेट मानकों पर खरी नहीं उतरी।
